Saturday, 14 February 2026

Premanand Ji Maharaj “जिस दिन मन भगवान में लग जाएगा, उसी दिन जीवन की दिशा बदल जाएगी।”

 

जीवन में सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेमानंद जी महाराज के प्रेरणादायक विचार

Premanand Ji Maharaj के विचार आज लाखों लोगों के जीवन को दिशा दे रहे हैं। उनके उपदेश सरल भाषा में होते हैं, लेकिन उनका प्रभाव अत्यंत गहरा होता है। वे जीवन को बदलने के लिए किसी जटिल साधना की नहीं, बल्कि मन के परिवर्तन की बात करते हैं।

इस ब्लॉग में हम उनके कुछ प्रमुख विचारों को विस्तार से समझेंगे और जानेंगे कि कैसे इन्हें अपनाकर हम अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।


1️⃣ “जिस दिन मन भगवान में लग जाएगा, उसी दिन जीवन की दिशा बदल जाएगी।”

मनुष्य का मन अत्यंत चंचल है। कभी वह भौतिक सुखों में भटकता है, कभी चिंताओं में उलझ जाता है। जब मन संसार में उलझा रहता है, तब जीवन तनाव और असंतोष से भरा रहता है।

प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि जिस दिन मन भगवान के नाम, भक्ति और सत्संग में लगने लगेगा, उसी दिन जीवन की दिशा बदल जाएगी।

भगवान में मन लगाने का अर्थ केवल पूजा-पाठ करना नहीं है। इसका अर्थ है:

  • हर कार्य को ईश्वर को समर्पित भाव से करना

  • हर परिस्थिति को उनकी इच्छा मानकर स्वीकार करना

  • मन में प्रेम, श्रद्धा और विश्वास बनाए रखना

जब मन दिव्यता से जुड़ता है, तब जीवन स्वतः शांत और संतुलित हो जाता है।


2️⃣ “सच्चा परिवर्तन बाहर से नहीं, भीतर से शुरू होता है।”

हम अक्सर सोचते हैं कि अगर परिस्थितियाँ बदल जाएँ, लोग बदल जाएँ या समय बदल जाए, तो हमारा जीवन बेहतर हो जाएगा। लेकिन प्रेमानंद जी स्पष्ट कहते हैं कि असली परिवर्तन भीतर से शुरू होता है।

यदि मन में नकारात्मकता, ईर्ष्या, क्रोध और अहंकार है, तो बाहरी बदलाव भी स्थायी सुख नहीं दे सकते।

भीतर का परिवर्तन कैसे शुरू करें?

  • आत्मचिंतन करें

  • अपनी गलतियों को स्वीकार करें

  • रोज़ कुछ समय ध्यान और नाम जप में लगाएँ

  • सकारात्मक सोच विकसित करें

जब अंदर की सोच बदलती है, तब बाहर की दुनिया भी बदलती हुई दिखाई देती है।


3️⃣ “जो व्यक्ति अपने दोष देख लेता है, वही सुधार की ओर पहला कदम बढ़ाता है।”

दूसरों की गलतियाँ देखना आसान है, लेकिन अपनी कमियाँ स्वीकार करना कठिन।
प्रेमानंद जी कहते हैं कि आत्मसुधार की शुरुआत अपने दोषों को पहचानने से होती है।

जब हम अपनी कमजोरियों को स्वीकार करते हैं, तभी सुधार का द्वार खुलता है।
यदि हम हर गलती के लिए दूसरों को दोष देते रहेंगे, तो कभी आगे नहीं बढ़ पाएँगे।

आत्मविश्लेषण के कुछ सरल तरीके:

  • दिन के अंत में अपने व्यवहार का मूल्यांकन करें

  • सोचें कि कहाँ बेहतर व्यवहार कर सकते थे

  • गलतियों को दोहराने से बचें

यही अभ्यास धीरे-धीरे व्यक्तित्व को निखार देता है।


4️⃣ “ईश्वर पर भरोसा रखो, परिस्थिति चाहे जैसी भी हो।”

जीवन में कठिन समय अवश्य आते हैं। कभी आर्थिक संकट, कभी स्वास्थ्य समस्या, कभी संबंधों में तनाव — ये सब जीवन का हिस्सा हैं।

ऐसे समय में प्रेमानंद जी महाराज विश्वास रखने की प्रेरणा देते हैं।
वे कहते हैं कि यदि ईश्वर पर सच्चा भरोसा है, तो भय और चिंता स्वतः कम हो जाते हैं।

विश्वास हमें मानसिक शक्ति देता है।
जब हम यह मान लेते हैं कि जो हो रहा है, वह किसी बड़ी योजना का हिस्सा है, तब हम परिस्थिति से टूटते नहीं, बल्कि मजबूत बनते हैं।


5️⃣ “मन को जीत लिया तो संसार को जीत लिया।”

मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु उसका अपना मन है।
मन ही इच्छाओं को जन्म देता है, मन ही क्रोध को बढ़ाता है और मन ही मोह में फँसाता है।

यदि मन पर नियंत्रण हो जाए, तो जीवन सरल हो जाता है।
मन को जीतने के लिए:

  • नियमित ध्यान करें

  • नकारात्मक विचारों को पहचानें और बदलें

  • क्रोध आने पर मौन धारण करें

  • संयम का अभ्यास करें

जब मन शांत होता है, तो व्यक्ति हर परिस्थिति में संतुलित रहता है।


6️⃣ “सेवा और साधना से ही जीवन पवित्र बनता है।”

प्रेमानंद जी सेवा को सबसे बड़ा धर्म मानते हैं।
सेवा केवल धन देने तक सीमित नहीं है; यह किसी की सहायता करना, किसी को सांत्वना देना, या समाज के लिए कुछ सकारात्मक करना भी है।

साधना का अर्थ है नियमित आध्यात्मिक अभ्यास — जैसे नाम जप, ध्यान, सत्संग।

जब सेवा और साधना साथ चलती हैं, तो जीवन में पवित्रता आती है।
सेवा से अहंकार कम होता है और साधना से मन शुद्ध होता है।


7️⃣ “क्रोध छोड़ो, क्षमा अपनाओ — यही सच्चा बदलाव है।”

क्रोध व्यक्ति की बुद्धि को नष्ट कर देता है।
क्षणिक क्रोध जीवनभर का पछतावा बन सकता है।

प्रेमानंद जी क्षमा को सच्चा बदलाव बताते हैं।
क्षमा करने से:

  • मन हल्का होता है

  • संबंध सुधरते हैं

  • तनाव कम होता है

क्षमा का अर्थ कमजोरी नहीं, बल्कि आंतरिक शक्ति है।
जो क्षमा कर सकता है, वही वास्तव में मजबूत है।


🌿 निष्कर्ष: छोटे कदम, बड़ा बदलाव

प्रेमानंद जी महाराज के इन विचारों का सार यही है कि जीवन में बदलाव लाने के लिए किसी बड़ी क्रांति की आवश्यकता नहीं है।

  • मन को भगवान से जोड़ें

  • आत्मचिंतन करें

  • विश्वास रखें

  • सेवा और साधना करें

  • क्रोध छोड़कर क्षमा अपनाएँ

ये छोटे-छोटे कदम धीरे-धीरे जीवन को नई दिशा दे देते हैं।

जब भीतर शांति और विश्वास स्थापित हो जाता है, तब बाहरी परिस्थितियाँ हमें विचलित नहीं कर पातीं। यही सच्चा परिवर्तन है — जो भीतर से शुरू होकर पूरे जीवन को प्रकाशित कर देता है।


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गौतम बुद्ध के विचार — जीवन परिवर्तन की दिशा में विस्तृत चिंतन

 

🌼 गौतम बुद्ध के विचार — जीवन परिवर्तन की दिशा में विस्तृत चिंतन

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Gautama Buddha केवल एक महापुरुष ही नहीं, बल्कि मानवता के मार्गदर्शक थे। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने 2500 वर्ष पहले थे। उनका संदेश सरल, गहन और जीवन को जड़ से बदल देने वाला है। यह लेख बुद्ध के विचारों पर आधारित एक विस्तृत चिंतन है, जो जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा देता है।


🌿 1. परिवर्तन का मूल — मन की शुद्धि

बुद्ध का प्रथम और प्रमुख संदेश था —
“मन ही सब कुछ है; तुम जो सोचते हो, वही बन जाते हो।”

मनुष्य का जीवन उसके विचारों का परिणाम है। यदि विचार नकारात्मक हैं, तो जीवन दुःखमय होगा; यदि विचार शुद्ध और सकारात्मक हैं, तो जीवन सुखमय होगा। इसलिए परिवर्तन का पहला कदम है — अपने मन को समझना और उसे शुद्ध करना।

मन को शुद्ध करने के लिए बुद्ध ने ध्यान (Meditation) और सतर्कता (Mindfulness) का मार्ग बताया। जब व्यक्ति अपने विचारों को बिना किसी निर्णय के देखता है, तो वह धीरे-धीरे उनके ऊपर नियंत्रण प्राप्त कर लेता है।


🌸 2. चार आर्य सत्य — जीवन की वास्तविकता

बुद्ध ने जीवन के गहन विश्लेषण के बाद चार आर्य सत्य बताए:

  1. दुःख है।

  2. दुःख का कारण है — तृष्णा (अत्यधिक इच्छा)।

  3. दुःख का निवारण संभव है।

  4. दुःख निवारण का मार्ग है — अष्टांगिक मार्ग।

इन सत्यों को समझना ही जीवन परिवर्तन की दिशा में पहला कदम है। जब व्यक्ति यह स्वीकार कर लेता है कि दुःख जीवन का हिस्सा है, तभी वह उसके समाधान की ओर बढ़ता है।


🌺 3. अष्टांगिक मार्ग — परिवर्तन की संपूर्ण प्रक्रिया

बुद्ध ने दुःख से मुक्ति के लिए अष्टांगिक मार्ग बताया:

  1. सम्यक दृष्टि

  2. सम्यक संकल्प

  3. सम्यक वाणी

  4. सम्यक कर्म

  5. सम्यक आजीविका

  6. सम्यक प्रयास

  7. सम्यक स्मृति

  8. सम्यक समाधि

यह मार्ग केवल धार्मिक सिद्धांत नहीं, बल्कि जीवन जीने की व्यावहारिक पद्धति है। यदि व्यक्ति इन आठ नियमों को अपनाता है, तो उसका जीवन संतुलित और शांतिपूर्ण हो जाता है।


🌼 4. मध्यम मार्ग — संतुलन का सिद्धांत

बुद्ध ने सिखाया कि जीवन में न तो अत्यधिक भोग अच्छा है और न ही अत्यधिक त्याग।
उन्होंने “मध्यम मार्ग” का सिद्धांत दिया — संतुलित जीवन।

आज के समय में भी यह अत्यंत प्रासंगिक है।
काम और विश्राम, धन और संतोष, परिवार और आत्मचिंतन — हर क्षेत्र में संतुलन आवश्यक है।


🌻 5. करुणा और प्रेम — सच्चा धर्म

बुद्ध ने कहा:
“घृणा से घृणा समाप्त नहीं होती; प्रेम से ही घृणा समाप्त होती है।”

करुणा (Compassion) उनके उपदेशों का केंद्र थी।
यदि हम दूसरों के दुःख को समझें और उनकी सहायता करें, तो समाज स्वतः बदल जाएगा।

करुणा से:

  • संबंध मजबूत होते हैं

  • मन शांत होता है

  • समाज में सद्भाव बढ़ता है


🌷 6. अहिंसा — सर्वोच्च आचरण

बुद्ध ने अहिंसा को सर्वोच्च धर्म माना।
अहिंसा केवल शारीरिक हिंसा न करना ही नहीं, बल्कि वाणी और विचार से भी किसी को चोट न पहुँचाना है।

जब हम क्रोध में कठोर शब्द बोलते हैं, तो वह भी हिंसा है।
इसलिए वाणी पर नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है।


🌹 7. आत्मनिर्भरता — अपने दीपक स्वयं बनो

बुद्ध का अंतिम संदेश था:
“अप्प दीपो भव” — अपने दीपक स्वयं बनो।

अर्थात, दूसरों पर निर्भर न रहो; स्वयं अपने मार्गदर्शक बनो।
ज्ञान और विवेक के आधार पर निर्णय लो।

यह संदेश आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को बढ़ाता है।


🌿 8. वर्तमान में जीना

बुद्ध ने वर्तमान क्षण में जीने का महत्व बताया।
अतीत पर पछतावा और भविष्य की चिंता — दोनों ही मन को अशांत करते हैं।

जब व्यक्ति वर्तमान में जीता है:

  • उसका ध्यान केंद्रित रहता है

  • तनाव कम होता है

  • जीवन में आनंद बढ़ता है


🌺 9. इच्छाओं पर नियंत्रण

बुद्ध के अनुसार दुःख का मूल कारण तृष्णा है।
अत्यधिक इच्छाएँ व्यक्ति को असंतुष्ट बनाती हैं।

इच्छाओं को नियंत्रित करने से:

  • संतोष बढ़ता है

  • मानसिक शांति मिलती है

  • जीवन सरल बनता है


🌸 10. ध्यान — आत्मबोध का मार्ग

ध्यान केवल आँख बंद करना नहीं है।
यह आत्मा से जुड़ने की प्रक्रिया है।

नियमित ध्यान से:

  • मन शांत होता है

  • एकाग्रता बढ़ती है

  • आत्मज्ञान प्राप्त होता है


🌼 11. धैर्य और सहनशीलता

बुद्ध ने धैर्य को सबसे बड़ा तप कहा।
जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं, पर जो धैर्य रखता है, वही सफल होता है।


🌻 12. निष्कर्ष — वास्तविक परिवर्तन

गौतम बुद्ध के विचारों का सार यह है कि:

  • मन को शुद्ध करो

  • इच्छाओं को सीमित करो

  • करुणा अपनाओ

  • मध्यम मार्ग पर चलो

  • वर्तमान में जियो

  • आत्मनिर्भर बनो

जब ये सिद्धांत जीवन में उतर जाते हैं, तो व्यक्ति का जीवन बदल जाता है।


🌟 अंतिम प्रेरणा

जीवन में परिवर्तन बाहर की परिस्थितियों से नहीं, भीतर की जागृति से आता है।
यदि हम बुद्ध के विचारों को अपनाएँ, तो हमारा जीवन शांत, संतुलित और आनंदमय बन सकता है।

“हजारों युद्ध जीतने से बेहतर है स्वयं पर विजय पाना।”

प्रेमानंद जी महाराज के विचार – जीवन परिवर्तन की दिशा में (विस्तृत प्रेरक लेख)

 

 प्रेमानंद जी महाराज के विचार – जीवन परिवर्तन की दिशा में (विस्तृत प्रेरक लेख)

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Premanand Ji Maharaj के विचार आज के समय में लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहे हैं। उनका संदेश सरल है, पर प्रभाव अत्यंत गहरा — “मन को भगवान से जोड़ो, जीवन स्वयं सुधर जाएगा।”

नीचे प्रस्तुत यह विस्तृत लेख उनके उपदेशों और विचारों की भावना पर आधारित है, जो जीवन में आंतरिक बदलाव, आध्यात्मिक जागरण और सकारात्मक सोच को प्रेरित करता है।


🌿 1. परिवर्तन की शुरुआत – भीतर से

प्रेमानंद जी कहते हैं कि मनुष्य अक्सर अपने जीवन की समस्याओं के लिए बाहरी परिस्थितियों को दोष देता है। वह समाज, परिवार, भाग्य या समय को जिम्मेदार मानता है, परंतु कभी अपने मन की ओर नहीं देखता। उनका स्पष्ट संदेश है कि सच्चा परिवर्तन बाहर नहीं, भीतर से प्रारंभ होता है।

जब मन शुद्ध होगा, विचार सकारात्मक होंगे और उद्देश्य स्पष्ट होगा, तब जीवन की दिशा स्वयं बदल जाएगी। मनुष्य को पहले अपने भीतर झांकना चाहिए — क्या मेरे विचार शुद्ध हैं? क्या मेरे कर्म सच्चे हैं? क्या मेरा आचरण धर्म के अनुरूप है?

यदि उत्तर ‘नहीं’ है, तो बदलाव यहीं से शुरू करना चाहिए।


🌸 2. मन पर विजय – जीवन पर विजय

प्रेमानंद जी का एक प्रसिद्ध विचार है:
“जिसने मन को जीत लिया, उसने संसार को जीत लिया।”

मन चंचल है। यह कभी अतीत में भटकता है, कभी भविष्य की चिंता करता है। यही मन हमें क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार की ओर ले जाता है। परंतु यदि यही मन भगवान के नाम में लग जाए, तो वही मुक्ति का मार्ग बन जाता है।

मन को नियंत्रित करने के लिए वे तीन उपाय बताते हैं:

  • नाम जप

  • सत्संग

  • सेवा

इन तीनों से मन धीरे-धीरे शांत होता है और व्यक्ति के भीतर स्थिरता आती है।


🌺 3. नाम स्मरण की शक्ति

प्रेमानंद जी कहते हैं कि इस युग में सबसे सरल साधना है — नाम जप।
जब मनुष्य भगवान का नाम लेता है, तो उसके भीतर की नकारात्मकता धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है।

नाम जप केवल शब्दों का उच्चारण नहीं, बल्कि भाव का संचार है। जब व्यक्ति प्रेम से, श्रद्धा से और समर्पण से नाम लेता है, तो उसका हृदय निर्मल होने लगता है।

वे कहते हैं:
“नाम में इतनी शक्ति है कि वह पत्थर को भी पार लगा दे।”

नाम स्मरण से:

  • मन शांत होता है

  • तनाव कम होता है

  • आत्मविश्वास बढ़ता है

  • जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है


🌼 4. अहंकार त्यागो, विनम्रता अपनाओ

अहंकार जीवन के पतन का कारण है। प्रेमानंद जी कहते हैं कि जब व्यक्ति स्वयं को सबसे बड़ा समझने लगता है, तभी उसका पतन आरंभ हो जाता है।

विनम्रता से व्यक्ति का व्यक्तित्व निखरता है। जो झुकता है, वही ऊँचा उठता है।

अहंकार त्यागने के उपाय:

  • स्वयं की गलतियों को स्वीकार करना

  • दूसरों की अच्छाइयों की सराहना करना

  • सेवा भाव रखना


🌻 5. सेवा – सच्चे सुख का मार्ग

प्रेमानंद जी का मानना है कि सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं।
जब हम बिना स्वार्थ के किसी की सहायता करते हैं, तो हमारे भीतर आनंद उत्पन्न होता है।

सेवा केवल दान देना नहीं है। सेवा का अर्थ है:

  • किसी दुखी को सांत्वना देना

  • किसी जरूरतमंद की सहायता करना

  • समाज के लिए कुछ सकारात्मक करना

वे कहते हैं:
“सेवा से हृदय पवित्र होता है और पवित्र हृदय में ही भगवान निवास करते हैं।”


🌷 6. संकट – ईश्वर की परीक्षा

जीवन में कठिनाइयाँ अवश्य आती हैं। परंतु प्रेमानंद जी कहते हैं कि संकट भगवान की परीक्षा नहीं, बल्कि हमारी परीक्षा है।

कठिन समय में धैर्य रखना ही सच्ची भक्ति है।
जो व्यक्ति संकट में भी ईश्वर पर विश्वास रखता है, वही सच्चा भक्त है।

संकट हमें सिखाता है:

  • धैर्य

  • संयम

  • सहनशीलता

  • आत्मबल


🌹 7. क्रोध छोड़ो, क्षमा अपनाओ

क्रोध व्यक्ति की बुद्धि को नष्ट कर देता है।
प्रेमानंद जी कहते हैं कि क्रोध में लिया गया निर्णय हमेशा गलत होता है।

क्षमा से मन हल्का होता है।
जो दूसरों को क्षमा कर देता है, वह स्वयं भी मुक्त हो जाता है।


🌿 8. संतोष – सुख का मूल मंत्र

आज का मनुष्य असंतोष में जी रहा है। उसे जो मिला है, वह कम लगता है।

प्रेमानंद जी कहते हैं:
“जिसके पास संतोष है, वही सच्चा धनवान है।”

संतोष का अर्थ है:

  • जो है, उसमें खुशी ढूँढना

  • दूसरों से तुलना न करना

  • ईश्वर की इच्छा में प्रसन्न रहना


🌺 9. सत्संग की महिमा

सत्संग का अर्थ है — सत्य का संग।
अच्छे विचार, अच्छे लोग और अच्छा वातावरण — ये तीनों मिलकर व्यक्ति का जीवन बदल देते हैं।

सत्संग से:

  • मन शुद्ध होता है

  • ज्ञान बढ़ता है

  • जीवन का उद्देश्य स्पष्ट होता है


🌸 10. प्रेम – जीवन की असली शक्ति

प्रेमानंद जी के अनुसार, संसार का मूल तत्व प्रेम है।
जहाँ प्रेम है, वहाँ ईश्वर है।

प्रेम का अर्थ केवल भावनात्मक लगाव नहीं, बल्कि करुणा, सहानुभूति और समर्पण है।


🌼 11. आत्मचिंतन – रोज़ का अभ्यास

हर रात स्वयं से पूछें:

  • आज मैंने क्या अच्छा किया?

  • कहाँ गलती हुई?

  • कल मैं क्या सुधार सकता हूँ?

यह अभ्यास धीरे-धीरे जीवन में बड़ा परिवर्तन लाता है।


🌹 12. निष्कर्ष – जीवन का वास्तविक परिवर्तन

प्रेमानंद जी के विचारों का सार यही है कि:

  • मन को भगवान से जोड़ो

  • अहंकार त्यागो

  • सेवा करो

  • नाम जपो

  • संतोष रखो

  • प्रेम फैलाओ

जब ये बातें जीवन में उतर जाती हैं, तब व्यक्ति का जीवन बदल जाता है।

परिवर्तन कोई एक दिन का कार्य नहीं है। यह निरंतर साधना है।
छोटे-छोटे कदम ही बड़े बदलाव लाते हैं।


🌟 अंतिम संदेश

जीवन में यदि शांति, आनंद और सफलता चाहिए, तो बाहरी दुनिया को बदलने से पहले अपने मन को बदलो।

“मन बदलेगा तो भाग्य बदलेगा, और भाग्य बदलेगा तो जीवन स्वयं सुंदर हो जाएगा।”


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Tuesday, 9 July 2013

THOUGHT OF THE DAY

                                                 THOUGHT OF THE DAY 





















          Ravi